मुस्कुराते हैं हम, मगर अंदर से वीराने।
और पागल इतनी है कि फिर से यकीन कर लेते हैं…!
वही बिछड़ के कह रहा है तुम तो खुश हो ना…!
तो फिर इस बीमारी की दवा क्यों नहीं मिलती?
इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,
चाहकर भी उनसे नाता तोड़ा नहीं जा सकता।
ख़ुद को लाख संभाल लूँ, मगर ख़याल तो रहेगा।
संवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है
बहुत उदास करती हैं Sad Shayari in Hindi मुझको निशानियाँ तेरी.
रिश्ते निभाने की उम्मीद हमसे ही क्यों,
कील कि तरह सीधे रहोगे तो ठोक दिये जाओगे।
दर्द तो तब हुआ… जब पता चला तीर चलाने वाले अपने ही निकले।
वरना “मेरी जान” लगाकर भूल जाने से तो पौधे भी मुर्झा जाते है…!
अजीब मुक़ाम से गुजरा है क़ाफ़िला ज़िंदगी का ,